सफलता का पर्याय..सफलतम 25 वर्ष

एकाग्रता: सफलता का मूलमंत्र है ....

गुरु द्रोणाचार्य ने एक बार अपने शिष्यों से उनकी परीक्षा लेने के लिए वृक्ष पर बैठी चिडिया की आॅख भेदने को कहा। परीक्षा कठिन थी किन्तु गुरु द्रोणाचार्य के शिष्यो की इससे बडी परिक्षा और क्या हो सकती थी ? परीक्षा शुरु होने से पहले गुरु ने शिष्यों से बारी बारी से पूछा - बताओ पेड पर तुम्हे क्या दिखाई दे रहा है ? किसी शिष्य ने कहा- चिडिया। किसी ने कहा- पेड की डाली और उस पर बैठी चिडिया किन्तु जब अर्जुन की बारी आई तो उसने कहा - गुरुदेव मुझे सिर्फ चिडिया की आॅख दिख रही है। अर्जुन की एकाग्रता को देखकर गुरु भांप गए कि सभी शिष्यों में सिर्फ अर्जुन की चिडिया की आॅख को भेद सकेगा, ऐसा ही हुआ । अर्जुन का निशाना सही बैठा, वह गुरु द्वारा ली गई परीक्षा मे अव्वल रहा। इस कहानी का एकमात्र संदेश है। - ‘सफलता पाने के लिए मन में एकाग्रता अवश्यंभावी है।‘ जीवन मे सभी सफल होना चाहते है। कुछ लोग सफलता पाने के लिए परिश्रम भी करते है। और उनमें साहस भी होता है किन्तु वे सफल नही हो पाते है। इसका मूल कारण यह है कि लक्ष्य के प्रति उनके अंदर एकाग्रता नही होती है। यह सत्यापित है

कि मन की एकाग्रता के बिना सफलता मुमकिन नही है। आखिर मन की एकाग्रता है क्या ? अक्सर कई घंटे पढने के बाद हम पाते है कि पढा हुआ पाठ हमें याद ही नही है । इसका कारण सामान्यतः यह होता है कि पढाई के दौरान हमारा ध्यान इधर-उधर घूमता रहता है। किताब काॅपी पर मस्तिष्क एकाग्र नही हो पाता है। यदि इस बात को व्यापक स्तर पर देखे तो आप चाहे अध्ययन करते हो, प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी या व्यवसाय के क्षेत्र में हो, जब तक एकाग्रता से आप उसे नही करेंगे सफलता नही मिलेगी । काम के दौरान हमारा ध्यान भंग होता है, एकाग्रता नष्ट होती है, ऐसा क्यों होता है ? इसके कारण एंव उसके निवारण पर यदि हम ध्यान दें जो कुछ प्रमुख उभर कर सामने आते है, वे निम्न है -

1- सकारात्मक दृष्टिकोण: एकाग्रतापूर्वक अध्ययन जारी रखने के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

2- अध्ययन का समय: बचपन से ही हमें यह बताया जाता है कि सुबह का समय ब्रम्हा मुहूर्त होता है, सुबह के समय कोई भी कोलाहल नही होता है। अतः ध्यान भंग होने या एकाग्रता नष्ट होने की संभावना कम होती है एंव उस समय पढ गया याद रहता है।

1- चिंता: चिंता किसी भी समस्या का बडा कारण है। अतः अपने अध्यनकाल के दौरान चिंतामुक्त रहना चाहिए। यदि आप महान उपलब्धि चाहते है, तो याद रखें जिस व्यक्ति का उदेश्य स्थिर है, उसे कोई पराजित नही कर सकता। यदि अपनी शक्ति को आप एक स्थान पर एकत्रित नही कर सके तो आप कोई महान काम नही कर सकते है। और इस शक्ति को एकत्रित करने अर्थात एकाग्रता के लिए चाहिए दृढ संकल्प, धैर्य, लक्ष्य की धारणा, अध्यवसाय और लगन। यदि आप सचमुच सफलता चाहते है, तो इस शक्ति पहचाहिनये और एकाग्र मन से उसे केन्द्रित करके हर काम कीजिए। सफलता आपके द्वार पर खडी होगी।

शुभकामनाओं सहित,
सुधीर वाघेला
मुख्य सम्पादक

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